आज ही के दिन दलित आंदोलन के इतिहास में इस महत्वपूर्ण संगठन की स्थापना महाराष्ट्र में दलित कवि नामदेव ढसाल और जे. वी पंवार ने की थी। यह दलितों पर हो रहे जातीय उत्पीड़न और अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। दलित पैंथर के बारे में कहा जाता है कि उसका नाम सुनते ही नामी गुंडे भी थर्रा उठते थे संगठन के उभार और कार्यशैली के कारण पुलिस को भी दलितों के प्रति कार्यशैली बदलनी पड़ी।
